भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के प्रयासों से सीमा विवाद पर चीन के साथ काम चलाऊ संधि हो गई है। अजित डोभाल ने इस पर चीनी विदेश मंत्री चांग-ची से विडियो कांफ्रेसिंग के द्वारा लंबी बातचीत की और उन्हें यह समझा दिया कि यदि दोनों देशों के बीच सामरिक टकराव हुआ तो इसमें नुकसान चीन का ही अधिक होगा।

अतः आवश्यकता इस बात की है कि चीन जल्द से जल्द वास्तविक नियंत्रण रेखा से अपने सैनिकों को पीछे हटा ले। डोभाल ने यह भी बताया कि सारी दुनिया यह मान बैठी है कि कोरोना वायरस का संक्रमण चीन से ही आया है, इसलिए चीन के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि सारे संसार में अपनी छवि सुधारने के लिए वह भारत से दुश्मनी मोल नहीं ले। लगता है कि चीन के विदेश मंत्री को डोभाल की बातें सही लगी और उन्होंने यह वादा किया कि बहुत शीघ्र चीन की सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से दो किलोमीटर पीछे हट जाएगी। प्राप्त संकेतों से ऐसा लग रहा है कि चीन ने अपनी सेना एलएसी पर दो किलीेमीटर पीछे हटा ली और 62 नई पोस्ट जो उसने लद्दाखी सीमा पर बनाई थी वे उसने उसने नष्ट कर ली हैं। सीमा पर अपनी ओर जो टेंट लगाए थे, वे भी वहां से उखाड़ लिए हैं।

क्षण भर के लिए तो ऐसा लगता है कि चीन की समझ में आ गया है, परन्तु चीन एक अत्यन्त ही धूर्त और मक्कार देश है, वह कहता कुछ है और करता कुछ है। पहले भी जब चीन और भारत के बीच डोकलाम में झड़प हुई थी तब उसने वहां सड़क निर्माण रोक लिया था और अपनी सेना को भी थोड़ी देर के लिए पीछे हटा लिया था। परन्तु शीघ्र ही उसने नियंत्रण रेखा के पास फिर से तेजी से उस क्षेत्र में पक्की सड़क बनाना शुरू कर दिया था।

आज की तारीख में चीन पाकिस्तान को छोड़कर अपने सभी पड़ोसियों से लड़ रहा है। उसने सभी पड़ोसी देशों की जमीन हथिया ली है या कोशिश कर रहा है। कमजोर देश चीन की दादागिरी के सामने मुंह नहीं खोल सके। पड़ोसी देश फिलीपींस की जब चीन ने जमीन हड़पी और इसकी शिकायत फिलीपींस ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में की तथा अअंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने जब इसका निर्णय फिलीपींस के पक्ष में किया तो चीन ने उसे मानने से इन्ाकार कर दिया, परन्तु चीन को तब ‘छठी का दूध याद आ गया’ जब उसने वियतनाम पर चढ़ाई कर उस की जमीन हड़पने का प्रयास किया। वितयनाम की बहादुर सेना ने चीन को वहां से मार भगाया।

चीन यह भूल गया था कि वर्षों के खूनी संघर्ष में वियतनाम ने अमेरिका को हरा दिया था और अमेरिका अपनी दुम दबाकर वहां से भाग निकला था। आज की तारीख में पाकिस्तान को छोड़कर दुनिया के सारे देश जो चीन के खिलाफ हैं वे भारत के साथ खड़े हैं। इसमें अमेरिका, आॅस्ट्रेलिया और जापान के आ जाने से भारत की स्थिति और भी मजबूत हो गई है। अभी अमेरिका ने ‘साउथ चाइना सी’ में अपने कई परमाणु संपन्न जंगी जहाज उतार लिए हैं।

यह एक तरह से चीन को चेतावनी है कि यदि उसने तनिक भी चालबाजी की तो अमेरिका उसे नेस्तनाबूद कर देगा। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि पूरा भारत चीन के खिलाफ है और जगह-जगह चीनी सामान की होली खेली या जलाई जा रही है। हमें अपने पुराने अनुभवों से सीख लेनी चािहए। महात्मा गांधी ने अंग्रेजी सामान का बहिष्कार और मानचेस्टर में बने कपड़ों की होली जलाकर खादी को संपन्न किया और अंग्रेजों को भारत से भाग निकलने के लिए विवश कर दिया। उसी तरह यदि पूरे भारत में चीनी सामान का पूर्ण रूप से बहिष्कार हो जाए तो चीन की रीढ़ टूट जाएगी और लाचार होकर उसे आखिर में भारत से समझौता करना ही पड़ेगा।

यह तो मानना ही पड़ेगा कि चीन वाकई ही एक परम धूर्त देश है। वह कहता कुछ है और करता कुछ है, परन्तु जिस तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लद्दाख जाकर चीन को ललकारा है उससे लगता है कि चीन के होश ठिकाने आ गए हैं। सबसे अधिक आवश्यक यह है कि कष्ट सहकर भी हम चीनी सामान का व्यापक पैमाने पर बहिष्कार करें। भारत सरकार ने तो इस दिशा में बहुत महत्वपूर्ण कदम उठाया है और चीनी कंपनियों को जो करोड़ों रुपये के ठेकों जिनमें रेलवे और दूसरे क्षे़त्रों के ठेके शामिल हैं, दिए थे को निरस्त कर दिया है। इसके अलावा भारत ने चीन की 59 एप्लीकेशन को भारत में पूर्ण रूप से बंद कर दिया है।

आज पूरे देश में चीन के खिलाफ भयानक रोष है। ऐसी स्थिति में ये बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण लगता है कि कुछ विपक्षी नेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आलोचना करते हैं। आज देश के सभी राजनीतिक दलों को अपने मतभेद भुलाकर सरकार के साथ खड़ा रहना चाहिये। 1962 की बात याद आ रही है जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया था उन दिनों मैं ‘फुलब्राइट स्कोलरशिप’ के तहत अमेरिका में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहा था। उन दिनों अमेरिका में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों की संख्या बहुत कम होती थी, परन्तु हर हिन्दुस्तानी छात्र ने जी जान से अपने खर्चे से पैसा बचाकर भारत सरकार को विदेशी मुद्रा के रूप में सहायता के लिए भेजा था जिससे भारत अस्त्र-शस्त्र खरीद सके। कुछ दिनों के लिए मैं छुट्टियों में भारत आया था और मैंने देखा था कि भारतवासियों के मन में चीन के खिलाफ भयानक रोष है। महिलाओं ने अपने बहुमूल्य जेवर सरकार को दान में यह कहकर दे दिए कि इन से भारतीय सैनिकों के लिए अस्त्र-शस्त्र खरीदे जाएं।

उन दिनों भारत आर्थिक रूप से इतना मजबूत नहीं था और तत्कालीन प्रधानमंत्री को यह सपने में भी आशंका नहीं थी कि चीन धोखेबाजी कर भारत पर चढ़ आएगा, परन्तु आज भारत एशिया का एक अत्यन्त मजबूत देश है और हर दृष्टि से चीन को टक्कर देने में समर्थ है। भारत के लोगों में असीम उत्साह है। अतः हमें हर क्षेत्र में चीन को नीचा दिखाने का प्रयास करना चाहिए। सबसे बड़ी बात तो यह है कि यदि हमने चीनी सामान का पूर्ण बहिष्कार शुरू कर दिया तो चीन की तो खाट ही खड़ी हो जाएगी। आवश्यकता है चीन की चालाकी और मक्कारी को समझने की। आज जब चीन और पाकिस्तान घी-खिचड़ी हो रहे हैं तो हमारी कठिनाई और भी बढ़ जाती है, परन्तु हर भारतवासी को यह पूर्ण विश्वास है कि वह चीन और पाकिस्तान के नापाक गठबंधन को मुंहतोड़ जवाब देगा। कुल मिलाकर स्थिति यह बनती है कि हर भारतीय को सजग रहकर और कष्ट सहकर भी सस्ते चीनी सामान का पूर्ण बहिष्कार करना होगा। थोड़ा संयम और धैर्य रखकर यह मानकर चलना होगा कि भारत का भविष्य उज्ज्वल है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here