मेडीटेशन Meditation में उन्नति हो रही है किस प्रकार पता चलता है ?

ध्यान में प्रगति हो रही है इसके कुछ बहुत ही सामान्य और कुछ अति विशिष्ट लक्षण आप अनुभव करने लगेंगे, उनमें से एक महत्वपूर्ण लक्षण है आपके किसी चक्र का सक्रिय होना, यहाँ ध्यान रखें सक्रिय होना और जागृत होने में स्पष्ट अंतर है | ध्यान जब चक्र के माध्यम से लगे तो समझो की आप उन्नति कर रहे हो क्यूंकि यह ध्यान आपको अलग ही अनुभूति देता है, आपको समय का भी पता नहीं चलेगा की कब घंटा-दो-घंटा यूँ ही निकल गया | यह चक्र के द्वारा साधा गया ध्यान आपका मार्ग निश्चित कर देता है निर्गुण, निराकार के लिए |

जब आपको लगने लगे की आपका ध्यान आसन पर बैठने के कुछ ही मिनट्स में लगने लगा है तो समझो की आप उन्नति में हो क्यूंकि यह ध्यान आपको, आपके विचारों से तीव्रता से अलग-थलग करने लगता है, कभी ऐसा लगे भी की विचारों का प्रवाह आपको रोक रहा है तो चक्र आपको स्वतः पृथक करने लगता है विचारों से |

Meditation ध्यान-साधना के अलावा जब आपको लगे की आप कहीं खड़े हुए या बैठे तो हो लेकिन पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल आपको झूले की तरह दाएं-बाएं-ऊपर-निचे प्रतीत हो, आपको लगे की आपके पैरों के निचे की जमीन आपको ऊपर धकेल रही है तो समझों गुरुत्वाकर्षण आपके सूक्ष्म को नियंत्रित करने के प्रयास में है | इसका मतलब अब आपका ध्यान और ज्यादा उन्नति कर रहा है |

ध्यान में खुली आँखों से जब आप अपने स्थूल शरीर को गति करते हुए देखो या सामने के ऑब्जेक्ट्स आदि आपको गतिशील लगने लगें तो समझो की आपका ध्यान उन्नति पर है, यह लगता तो ऐसे है की आपका शरीर गति कर रहा है पर वास्तविकता में यह आपका सूक्ष्म होता है जो की शून्य होने का प्रतीक है| शून्य होना मतलब शुद्ध होना, प्योर होना और कुछ भी 100% प्योर एलिमेंट पृथ्वी पर नहीं रह सकता, इसलिए सूक्ष्म अतिशुद्ध होने कारन, शून्य होने कारण पृथ्वी को छोड़ने की जुगत में रहता है |

Meditation अब आपका ध्यान यहाँ से एक अलग आयाम पकड़ने लगता है क्यूंकि चक्र ध्यान आपको संयत और उच्चतम अवस्था में रखता है और आपका सूक्ष्म अब ब्रह्माण्ड में विचरने लगता है, आपको प्रतीत होगा की आप बादलों में उड़ रहे हो, आपके दोनों कानों से हवा का तीव्र वेग आपको बैठे हुए ही सुनाई देने लगेगा और यह अति-वास्तविक होगा, कोई अनुभव या आभास नहीं एकदम सच | गुरुत्वाकर्षण बल आपको झटके देने लगेगा जैसे की रेल – बस – गाड़ी में हमको झटके लगते हैं और यही झटके इस बात का प्रमाण हैं की आप ध्यान में होते हुए भी ब्रहाण्ड में विचरण कर रहे हो | यह अनुभव बस कुछ कहने नहीं, वाह !

Image from Google (कंपनी)

Meditation ध्यान की यह उन्नति एक निश्चित समय अवधि बाद आपको बादलों की यात्रा से निकाल कर सत्य की तरफ द्रष्ट करने लगती है और अब आपका सूक्ष्म अनन्त अंतरिक्ष में यात्रा करने लगता है | क्यूंकि अंतरिक्ष की कोई सीमा नहीं, वहां हवा नहीं तो झटके नहीं लगेंगे, स्थिरता लगेगी लेकिन यात्रा में ही हो बस उसका अति-विशाल और अनन्तस्वरूप आपको ऐसा प्रतीत करता है की आप अंतरिक्ष में स्थिर हो | अब आप अपने आसन पर बैठकर भी पृथ्वी पर नहीं हो | आपको ऊपर, अपने जमीन पर जहाँ आप आसन लगाकर बैठे हो, दाएं-बाएं सब तरफ स्याह काला अंतरिक्ष और टिमटिमाते असंख्य तारे, दूर-पास होते हुए दिखाई देंगे | यह कोई अनुभव नहीं होगा, यह एक खरा सोने जैसा सच होगा |

Meditation ध्यान की इस अवस्था में आपको दिन में भी अपने आसपास अंतरिक्ष और तारे दिखने लगेंगे, आपके सामने चाहे कोई भी ऑब्जेक्ट हो जैसे की कोई बिल्डिंग, या ऑफिस की दीवार, कोई व्यक्ति या कुछ भी, आपको उसके आर-पार देखने लगोगे और जो दिखेगा वो है यूनिवर्स | इस यूनिवर्स की यात्रा में आपको अपना शरीर रुई की तरह हल्का, भारहीन और आसमान से जमीन की तरफ गिरता हुआ तो कभी ऊपर को विशाल आकार में बढ़ता हुआ लगेगा यह सब कमाल एक्चुअली आपके सूक्ष्म का होगा |

कुछ ज्यादा ही खींच दिया मैंने तो फिर कभी और सही, आखिर आपको बोर नहीं होने देना है |धन्यवाद !

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