रोजाना ५००-६०० लोगो की इस लॉकडाउन में खाना खिलाने वाले बोरिवली के बृजेश

बोरिवली: लॉक डाउन जहां हजारों प्रवासियों की जान की आफत बन गया है वहीं दूसरी तरफ देखा जाए तो इसी समाज से ऐसे लोग उभर के आगे आ रहे है जिन्हे समाज की चिंता है समाज के लोगो की चिंता है ऐसे लोग समाज की दिशा और दशा बदलने का माद्दा रखते है ।

इसी कड़ी हम आज जा मिले बोरिवली के MHB कॉलोनी के रहने वाले रहने वाले बृजेश राय जी से, बृजेश जी सड़क पर रहने वाले भिखारियो की लिए अन्नदाता बन कर उभरे है ।

रोजाना ५००-६०० लोगो की इस लॉकडाउन में खाना खिलाने वाले बृजेश जी एक आम दिन कि तरह ही ५०० से ६०० लोगो का खाना ले के अपने ही घर से निकाल जाते है और सड़क पर घूमते भिखारियों को खाना खिलाते है। इतना ही नहीं वे भिखारियों के पुनर्वसन की भी व्यवस्था करते है । उन्हें कपड़े इत्यादि देकरआवास की व्यवस्था करना भी उनके दैनिक कार्यों का हिस्सा है ।

हमारे रिपोर्ट अवधेश रॉय को भी एक दिन उनकी मुहिम का हिस्सा बनने का मौका मिला । जहां वे एक भिखारी के पुनर्वासन के प्रयासों में जुटे थे। भिखारी को नहला धुला के नए कपड़े दिए गए खाना दिया गया और साथ को आगे के जिंदगी को आसान बनाने के लिए कुछ काम भी दिया गया जिससे वो अपना पेट आसानी से पाल सके।
इसके बाद हम दहिसर से बांद्रा और फिर बोरीवली तक का सफर तय करके पहुंचे वहा जहा प्रवासी मज़दूर अपने अपने घरो को जाने के लिए चिलचिलाती हुयी धुप में खड़े अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे। उन गरीब प्रवासी मज़दूरों के खाने पिने का जिम्मा अपने ऊपर लेते हुए बृजेश जी ने उन्हें खाने के फूड्स पैकेट दिए इस दौरान उन्होंने सोशल डिस्टन्सिंग का भी बखूबी ध्यान रखा।
एक खास बात-चित में उन्होंने कहा कि हम कौन होते है मदद करने वाले , दाता तो केवल ऊपर वाला है , उन्होंने हमे सद्बुद्धि दी ताकि हम लोगो की मदद करते रहे, हमारे पास जो कुछ भी है इसी समाज से लिया दिया है और इसी समाज को हम यह समर्पित करते है जरुरी नहीं की किसी NGO से ही जुड़ कर लोगो की मदद की जाये, हमें अकेले भी ऐसे प्रयास करने चाहिए हम आगे भी यह प्रयास जारी रखना चाहतें हैं । वे कहते है कि नर सेवा से बड़ी आत्म संतुष्टि कुछ और नहीं हो सकती ।

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